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Monday, 14 December 2020

अधिकारों से वंचित किसानों को अपने उत्पाद का मूल्य निर्धारण करने और उसे अपनी इच्छा के अनुरूप स्थान पर बेचने आदि की स्वतंत्रता प्रदान करने के लिये तीन विधेयकों के माध्यम से कानूनी प्रावधान किये गए - पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा

 अधिकारों से वंचित किसानों को अपने उत्पाद का मूल्य निर्धारण करने और उसे अपनी इच्छा के अनुरूप स्थान पर बेचने आदि की स्वतंत्रता प्रदान करने के लिये तीन विधेयकों के माध्यम से कानूनी प्रावधान किये गए -  पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा

संजय शर्मा संपादक 

हैलो धार पत्रिका 

             धार-  स्वतंत्रता के बाद से लगातार अपनी उन्नति और खुशहाली के लिये तरस रहे किसानों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की दृष्टि से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने ऐतिहासिक कानूनी प्रावधान किये हैं।अधिकारों से वंचित किसानों को अपने उत्पाद का मूल्य निर्धारण करने और उसे अपनी इच्छा के अनुरूप स्थान पर बेचने आदि की स्वतंत्रता प्रदान करने के लिये तीन विधेयकों के माध्यम से कानूनी प्रावधान किये गये हैं। पहला - कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन आरै सरलीकरण) विधेयक 2020,

             दूसरा - कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020तीसरा - आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 ।एक राष्ट्र, एक बाजार की अवधारणा विकसित करने के लिये यह बाधा मुक्त व्यवस्था किसानों के लिये की गई है। यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री वरिष्ठ नेता श्री विक्रम वर्मा ने आज धार में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कही।


              पत्रकार वार्ता में पूर्व सांसद श्री कृष्ण मुरारी मोघे, भाजपा प्रदेश महामंत्री सुश्री कविता पाटीदार, धार विधायक श्रीमती नीना वर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष राजीव यादव, संभागीय सह मीडिया प्रभारी ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, किसान मोर्चा जगदीश जाट भी उपस्थित थे।

            पत्रकारों से चर्चा करते हुए श्री वर्मा कहा कि दिन-रात पसीना बहाने वाले किसान को अपनी फसलों का मूल्य स्वयं निर्धारित करने का अधिकार नहीं दिया गया और उसे दलालों के जबड़े में डालकर रखा गया।

          किसी भी प्रकार का उत्पाद करने वालों को अपने उत्पादन का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार सदैव से रहा, तब प्रश्न आता है कि कृषि प्रधान देश में यह अधिकार किसानों को क्यों नहीं दिया गया?

           आज जब किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का कानूनी प्रयास किया जा रहा है, तब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का विरोध यह इंगित करता है कि किसानों से दलाली खाने वालों से इनके संबंध क्या हैं। सच तो यह है कि देश और देश के लोगों के हित में जब भी फैसले लिये जाते हैं, तब कांग्रेस को विरोध ही करना होता है। 

                दुर्भाग्य से नये कानूनों के संदर्भ में विरोधी दलों ने किसानों के बीच भ्रम पैदा करने का पाप किया है। जिससे भय दिखाकर राजनीति करने का इनका एजेंंडा चलता रहे।

*हमारा प्रश्न है किः-*

• क्या किसान को अपने उत्पाद का दाम तय करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए?

क्या किसान को अपना उत्पाद किसी भी राज्य में जाकर बेचने की छूट नहीं मिलना चाहिए?

• क्या किसान के उत्पाद पर दलाली खाने की प्रथा को जारी रहना चाहिए?

• क्या किसान को अपना उत्पाद बेचने के लिये आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से बाजार तलाशने का अधिकार नहीं है?

• क्या किसान इस देश में अपनी फसल से संबंधित निर्माण उद्योग लगाने का अधिकारी नहीं है?

• क्या किसान को चुंगी और टैक्स की चक्की में पिसने के लिये छोड़ देना चाहिए?


केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के हित मेंं लाये गये

कानून को इस प्रकार समझा जा सकता है

• राज्यों की कृषि उपज मंडी समितियों (एपीएमसी) के अधिकार पूर्व की तरह रहेंगे। किसानों के पास सरकारी एजेंसियों का विकल्प खुला रहेगा।

• नये कृषि कानून किसानों के लिये अंतरराज्यीय व्यापार करने के लिये प्रोत्साहित करते हैं, जिससे किसान अपने उत्पादों को दूसरे राज्य में स्वतंत्र रूप से बेच सकेंगे तथा अपने उत्पाद का अधिकतम मूल्य प्राप्त कर सकेंगे।

• वर्तमान में राज्य कृषि उपज मंडी समितियों द्वारा विभिन्न वस्तुओं पर 1 प्रतिशत से 

• 10 प्रतिशत तक बाजारध्मंडी शुल्क वसूल किया जाता है, लेकिन अब कृषि उपज मंडी समितियों के बाहर व्यापार पर कोई राज्य या केन्द्रीय कर नहीं लगाया जाएगा।

• मंडी प्रांगण के बाहर कोई मंडी टैक्स नहीं लिया जाएगा इसलिए और कोई दस्तावेज की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। फसल का स्वतंत्र क्रय-विक्रय होने से खरीदार और किसान दोनों को लाभ होगा।

• कृषि करार के कारण किसान अपने कृषि उत्पाद की कीमत फसल बोने के पूर्व ही करार के माध्यम से तय कर सकेगा। अनुबंध खेती के कारण किसान को लाभ होगा। 

• कृषि करार केवल कृषि उपज से संबंध में होगा। इस करार के द्वारा किसी भी निजी एजेंसियों को किसानों की भूमि के साथ कुछ भी करने की अनुमति नहीं होगी।

• न ही क्रॉप कान्ट्रेक्ट अध्यादेश के तहत किसान की जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण होगा।

• नये अध्यादेश से किसानों के समूह स्वयं व्यापार और निर्यात से जुड़ पायेंगे, जो खेती को लाभदायक बनायेंगे।

• नये बिल कृषि क्षेत्र में अधिक निवेश को प्रोत्साहित करेंगे। निजी निवेश खेती के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेगा और रोजगार के अवसर पैदा करेगा। 

• राज्यों की कृषि उपज मंडी समितियों के माध्यम से संचालित कृषि उत्पाद विक्रय प्रणाली के तहत केवल लाइसेंस प्राप्त व्यापारी (जिसे आड़तिया यानी बिचौलिया भी शामिल है) को कृषि उत्पाद के संबंध में व्यापार करने की अनुमति थी, लेकिन नया विधेयक किसी को भी पैन नंबर के साथ व्यापार के करने की अनुमति देता है।

• नया बिल बाजार की अनिश्चितता के जोखिम को कम करेगा। क्योंकि किसान अपने उत्पाद की कीमत करार के माध्यम से पहले ही तय कर चुका होगा। 


          भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के महामंत्री सुश्री कविता पाटीदार ने कहा कि कांग्रेस और अन्य दलों के लोग एमएसपी को लेकर भ्रम फैला रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार कई बार यह स्पष्ट कर चुकी है कि एमएसपी लागू रहेगी। ये भ्रम फैला रहे हैं कि मंडियां खत्म हो जाएंगी, जबकि नए कानूनों में मंडियों के आधुनिकीकरण की बात है। कांट्रेक्ट फॉर्मिंग में किसान पहले ही अपनी उपज की कीमत तय कर सकेगा और कृषि व्यवसाय से अनिश्चितता खत्म होगी। संबंधित कानून में किसान की भूमि से कुछ भी छेड़छाड़ करने की अनुमति नहीं है। नये बिल से एमएसपी पर खरीदी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। स्वयं केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने घोषणा की है कि एमएसपी पूर्ववत जारी रहेगी। हाल ही में केन्द्र सरकार ने विभिन्न जिंसों की एमएसपी भी घोषित की है।

पत्रकार वार्ता को वरिष्ठ नेता कृष्ण मुरारी मोघे ने भी ने संबोधित किया।


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