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Saturday, 17 August 2019

11 मरीजों की आंख की रोशनी जाने के मामले में सरकार सख्त अस्पताल का लाइसेंस निरस्त ज्यादातर मरीज धार जिले के सिर्फ तीन मरीज है इंदौर के

11 मरीजों की आंख की रोशनी जाने के मामले में सरकार सख्त अस्पताल का लाइसेंस निरस्त ज्यादातर मरीज धार जिले के सिर्फ तीन  मरीज है इंदौर के

मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद मरीजों को हुआ संक्रमण  मुख्यमंत्री ने पीड़ितों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की

संजय शर्मा संपादक 
हैलो धार पत्रिका 
            इंदाैर- इंदौर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 11 मरीजों की आंखों की रोशनी चली जाने के मामले में सरकार ने कड़ी रवैया अपनाते हुए अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही ओटी को सील करवा दिया है। मामले की जांच के लिए सात सदस्यीय कमेटी बनाई गई। वहीं रेडक्राॅस से 20 हजार रुपए की मदद के साथ ही सभी पीड़ितों का इलाज सरकार करवाएगी, जिसके लिए उन्हें चोइथराम अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मुख्यमंत्री ने मामले में संज्ञान लेते हुए पीड़ितों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
ज्यादातर मरीज धार जिले के सिर्फ तीन  मरीज है इंदौर के
मनोहर रामकिशन धार 
सुशीला भगवतीलाल धार 
राधेश्याम चुन्नीलाल धार 
सुनीता बाई भगीरथ धार
रामी बाई तोलाराम धार
जीवन सिंह धार 
गेंदालाल नानूराम धार 
तुलसी बाई बिहारीलाल धार
कलाबाई कैलाश दास इंदौर 
हरपल प्रहलाद इंदौर 
कैलाश भगवान दास इंदौर
             आंख की रोशनी जाने की खबर प्रकाशित होने के बाद सरकार के साथ प्रशासन ने अस्पताल के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। स्वस्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने दोषियों को कड़ी सजा दिलवाने का कहते हुए जांच के लिए सात सदस्यीय कमेटी गठित की है। वहीं मंत्री जीतू पटवारी ने अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही ऑपरेशन थिएटर को भी सील करवा दिया है। मंत्री ने दोषी डॉक्टरों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की बात कही है। वहीं मामले में मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए पीड़ित मरीजों को चोइथराम अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। मुख्यमंत्री ने पीड़ितों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है। पूरे मामले में कलेक्टर लोकेश जाटव ने तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारी प्रकरण की जांच करेंगे। इस बात की भी जांच की जाएगी कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा किस तरह की लापरवाही बरती गई है। 
यह है मामला
           ये सभी मरीज 8 अगस्त को राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उसी दिन इनके ऑपरेशन हुए। अगले दिन आंखों में दवाई डालने के बाद इंफेक्शन हुआ और मरीजों ने हंगामा शुरू किया। कई मरीज रोने लगे। डॉक्टरों ने चेक किया तो बोले- हमें सब कुछ सफेद दिख रहा। कुछ ने बताया कि उन्हें सिर्फ काली छाया दिखाई दे रही है। जांच के बाद डॉक्टरों ने माना कि इंफेक्शन हो गया है, लेकिन वे यह नहीं बता सके कि इसकी वजह क्या है। इधर, स्वास्थ्य विभाग ने घटना के बाद हॉस्पिटल का ओटी सील कर दिया है। यहां आंखों के ऑपरेशन पर पाबंदी लगा दी है। जांच के बाद कारण स्पष्ट होने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है। अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधीर महाशब्दे ने बताया कि संक्रमण का कारण अब तक पता नहीं चला है। अन्य विशेषज्ञ भी जांच कर चुके हैं। सैंपल भी जांच के लिए भिजवाए हैं। 
पति-पत्नी दोनों ने ऑपरेशन करवाए, दोनों को दिखना बंद 
              फुटबॉल खिलाड़ी रहे मनोहर हरोर की बाईं आंख के मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के बाद जब दवाई डाली तो उस आंख से दिखना बंद हो गया। एक दिन के ऑपरेशन के लिए अस्पताल आए मनोहर को यहां 10 दिन हो गए हैं। पूरे दिन बिस्तर पर ही रहते हैं। 
               सबसे बुरी हालत सिरपुर निवासी बुजुर्ग दंपती कैलाश और कलावती की है। दोनों ने बाईं आंख का ऑपरेशन करवा लिया, अब देख नहीं पा रहे। सब कुछ धुंधला नजर आ रहा है। एक-दूसरे का आसरा बने हुए हैं, पर चिंता यह सता रही है कि रोशनी वापस लौटेगी कि नहीं। 
                  धार जिले की आहू निवासी रामी बाई रोज रोती हैं, उन्हें दोनों आंखों से दिखाई नहीं दे रहा। एक बेटा है, उसने कह दिया है कि जब आंख ठीक हो, तभी आना। अब घर जाना चाहती हैं, पर लापरवाही से लाचार हो गई हैं। 
               मामले में राष्ट्रीय अंधत्व निवारण शाखा के प्रमुख डॉ. टीएस होरा पहले कुछ भी कहने से बचते रहे। फिर कहा कि आला अधिकारियों से बात करें। इसके बाद जब उनकी अनभिज्ञता के बारे में पूछा तो बोले- अब स्थिति नियंत्रण में है। मरीजों का इलाज चल रहा है। 
             मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण जडिया ने बताया कि मरीजों को एंटीबायोटिक्स दिया जा रहा है। अस्पताल का ओटी बंद करवा दिया है। सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आती, वहां ऑपरेशन नहीं हो सकते। 
2010 में ऑपरेशन फेल, फिर भी नहीं हुई कोई सख्त कार्रवाई 
            इंदौर आई हॉस्पिटल में दिसंबर 2010 में भी मोतियाबिंद के ऑपरेशन फेल होने के बाद 18 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। इस पर तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. शरद पंडित ने संबंधित डॉक्टर व जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की। 24 जनवरी 2011 को अस्पताल को मोतियाबिंद ऑपरेशन व शिविर के लिए प्रतिबंधित कर दिया। इसके बाद शिविरों के लिए सीएमएचओ की मंजूरी अनिवार्य कर दी। कुछ महीने बाद अस्पताल पर पाबंदियां रहीं, फिर इन्हें शिथिल कर दिया। 2015 में बड़वानी में भी इसी तरह के मामले में 60 से ज्यादा लोगों की रोशनी चली गई थी।

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