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Sunday, 1 December 2019

मांडू में पांच दिनी मानस सम्मेलन का समापन रविवार को हुआ। यहां नौ ग्रहों की मूर्तियाें की प्राण प्रतिष्ठा की गई

मांडू में पांच दिनी मानस सम्मेलन का समापन रविवार को हुआ। यहां नौ ग्रहों की मूर्तियाें की प्राण प्रतिष्ठा की गई

नौ प्रकार की क्रियाओं से किया यज्ञ फिर मूर्तियों में डाले प्राण

संजय शर्मा संपादक 
हैलो -धार पत्रिका 
        धार - मांडू में पांच दिनी मानस सम्मेलन का समापन रविवार को हुआ। यहां नौ ग्रहों की मूर्तियाें की प्राण प्रतिष्ठा की गई। प्राण प्रतिष्ठा करने वाले विद्वानों ने समझाया कि जहां भगवान की प्रतिष्ठा होती है वहां पर अनेक कर्म यज्ञ आदि द्वारा प्रतिष्ठा कर्म पूर्ण होता है। जिस प्रकार से कोई बच्चा अपनी मां के गर्भ में 9 माह तक रहता है और अनेक क्रियाओं से गुजरता है उसी प्रकार से किसी भी मूर्ति में प्राण डालने के पूर्व उसे नौ प्रकार की क्रियाओं से उसका यज्ञ किया जाता है। 
          क्रियाओं द्वारा उसको जागृत किया जाता है। उन क्रियाओं के द्वारा ही मूर्ति जागृत होती है। प्राण प्रतिष्ठा कर्म 81 घंटों में पूर्ण हुआ। 21 आचार्यों द्वारा प्रतिदिन 25000 आहुतियां यज्ञ में डाली गई। 

              सात मंदिरों में हुई 21 मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा : इस पूरी प्राण प्रतिष्ठा और यज्ञ के निर्वाह को पांच दिनी पंडित योगेंद्र मलतारे के साथ 21 आचार्य पंडित ने पूरी पूजा विधिपूर्ण कराकर मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा कर सात मंदिर में 19 मूर्तियों की हुई। प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार और वैदिक विधान पाठ पूजा से पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर के साथ आचार्य पंडित ने प्राण प्रतिष्ठा कराई। 
मूर्तियों में इस प्रकार डाले जाते हैं प्राण 
          सर्वप्रथम मूर्ति को जल तत्व के लिए जल में रखा जाता है उसके बाद धन्य तत्व के लिए धन्य में रखा जाता है। मूर्ति का पुष्पाधिवास होता है। फलाधिवास किया जाता है। धूपाधिवास किया जाता है। मूर्ति को घी में रखा जाता है। इसी में निवास किया जाता है। मूर्ति को विभिन्न प्रकार के पत्तों में रखकर पत्राधिवास किया जाता है। मूर्ति को विभिन्न प्रकार के फलों में रखकर फल आदिवास किया जाता है। मूर्ति को मिष्ठान में रखकर मिष्ठान अधिवास किया जाता है। मूर्ति का शयनाधिवास किया जाता है। इसके बाद मूर्ति में प्राण डालने की प्रक्रिया होती है। 
108 प्रकार की औषधियों से कराया मूर्तियों को स्नान 

          मूर्ति में पूर्ण रूप से जागृति आए मूर्ति के दर्शन से पूर्ण फल प्राप्त हो। इसके लिए 108 प्रकार की औषधियों द्वारा मूर्ति का महा स्नान कराया प्राण प्रतिष्ठा के कर्म में देवी देवताओं का आह्वान कर उन्हें आहुतियां दी गईं। फिर मूर्तियों को गर्भ गृह में रखकर उनमें प्राणों का संचार किया गया। सभी इंद्रियों का आह्वान किया गया। 
            सभी प्रकार की ऊर्जा का संचार कर उन्हें प्राणों के साथ प्रतिष्ठित किया गया। शिखर के ऊपर कलश स्थापित किया गया। सीकर का महा स्नान किया गया। मूर्तियों को गर्भगृह में प्रतिष्ठित कर उनमें प्राणों का संचार हुआ। शृंगार कर उन्हें इस ग्रुप में प्रतिष्ठित कर पूजन करना प्रारंभ हुआ। भगवान यज्ञ नारायण की पूर्णाहुति हुई। 

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