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Sunday, 17 November 2019

अतिवर्ष्टि से सोयाबीन की बर्बादी से कर्ज में डूबे किसानों को राहत राशि के नाम पर एक पैसा नहीं मिला

अतिवर्ष्टि से सोयाबीन की बर्बादी से कर्ज में डूबे किसानों को राहत राशि के नाम पर एक पैसा नहीं मिला

संजय शर्मा संपादक 
हैलो  - धार पत्रिका 
           कोद - ( अनिल मारु संवाददाता  ) क्षेत्र में अतिवर्ष्टि से सोयाबीन की बर्बादी से कर्ज में डूबे किसानों को राहत राशि के नाम पर एक पैसा नहीं मिला है,वही रबी की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं,क्षेत्र के किसानों की गेहूं व मटर की फसल में इल्लियों का प्रकोप देखा जा रहा है,जड़ो में काली इल्लियां एवं थ्रिप्स की परेशानी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।
                हैरानी की बात तो यह है कि गेंहू की फसल में पहले कभी भी इल्ली नहीं देखी गई,लेकिन इस बार गेंहू की फसल पर ही इल्ली का प्रकोप है,जबकि इसके पहले वर्षों में केवल चना की फसल में ही इल्ली का प्रकोप होता था,लेकिन इस बार पहली बार ऐसा देख रहे हैं कि इतनी भारी मात्रा में गेहूं की फसल में बड़ी-बड़ी काली इल्ली लग रही हैं,जो कि गेहूं की फसल को जड़ से चट कर रही है, जिससे किसानों बहुत नुकसान हो रहा है,किसानों को समझ में नहीं आ रहा है कि इल्ली के लिए क्या उपाय करें,तरह-तरह की कीटनाशक दवाइयों का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इल्ली मर नहीं रही है, बल्कि कुछ बेहोशी की हालत में होकर दोबारा फिर फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। 
            क्षेत्र कोद,कोटेश्वर,बुल्गारी, रेशमगारा,मक्काखेड़ी, जालमपुरा,गवरीमाता,केसरपुरा,सहित अन्य गांव में गेहूं की फसलों को इल्ली लगातार चौपट कर रही है,जिससे किसान परेशान हैं,सभी जगह इन काली इल्लियों द्वारा गेंहू की फसल में जड़ो को क्षतिग्रस्त किया जा रहा है,गेंहू की पूरी फसले पीली पड़ रही है,इल्ली जड़ को खत्म करके पोधो को सुखा रही है,जड़ो के खत्म होने और गेहूं पीले पड़कर सुख रहे है,कई किसानों ने गेंहू में रोटावेटर करके दोबारा बोवनी की गई है।
             किसान संतोष गादिया ने बताया कि-" अतिवृष्टि में सोयाबीन की फसल बर्बाद हुई उसी तरह मेरी 8 बीघा गेहूं की फसल काली इल्लियां के प्रकोप होने के कारण फसल पीली एवं नष्ट हो रही है, जिसके लिए मुझे दोबारा से गेहूं की फसल लगाना पड़ेगी।
                इसी तरह किसान बगदीराम मड़ादा वाले 15 बीघा,भारत सिंह 5 बीघा,मुकेश नागाखिमा 5 बीघा,अशोक नागाखिमा 9 बीघा,मुकेश चावंडा,ईश्वर चावंडा सहित कई किसानों की फसल इल्लियों के प्रकोप से प्रभावित हुई है।
             वहीं बार-बार मौसम में हो रहे बदलाव के कारण अनुकूल वातावरण नहीं मिलने को लेकर पौधों की ग्रोथ अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पा रही है। रबी की फसल को बर्बाद होने से बचाने के लिए किसानों को तेजी से कदम उठाने होंगे।
          कोद निवासी 60 वर्षीय किसान भारत सिंह ने बताया की-" मैंने अपने जीवन काल में गेहूं की फसल को जड़ो से खत्म करते हुए इल्ली को कभी नहीं देखा है।
          कृषि विस्तार अधिकारी एन आर भाभर ने  बताया कि-"क्षेत्र में  किसानों को जागरूक एवं  सचेत किया जा रहा है कि गेहूँ फसल के जड़ क्षैत्र के ऊपरी हिस्से में माँहू व इल्ली का प्रकोप होने से फसल पिली पढ़कर सूख रही है, साथ ही काली इल्ली फसल के जड़ क्षैत्र को खाती है,जिससे बहुत किसानो ने तो फसल की जुताई कर री बोनी करने की तैयारी कर रहे है।यदि समय रहते फसल का उपचार नही किया तो 80 से 90 प्रतिशत तक फसल खराब हो जाती है, नियंत्रण के उपाय निम्नानुसार करे क्लोरिपाइरिफॉस्-50 ई0सी0 प्रति बिघा 500 मिली ग्राम या कार्बोफ्यूरान-3 जी 7 किलो प्रति बिघा दवाई को रेत में या DAP व यूरिया खाद में मिलाकर सिचाई के आगे -आगे देने से उक्त किट का नियंत्रण 100 प्रतिशत ठीक हो जावेगा।"

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