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Monday, 18 November 2019

किसानों को अब रबी की फसल में इल्लियों के प्रकोप से लाभ के आसार नजर नही आ रहे है

किसानों को अब रबी की फसल में इल्लियों के प्रकोप से लाभ के आसार नजर नही आ रहे है

संजय शर्मा संपादक 
हैलो -धार पत्रिका 
            कोद - ( अनिल मारु ) रबी की फसल में क्षेत्र के किसानों की परेशानी दिनों  दिन बढ़ती प्रतीत हो रही है,इधर निरन्तर किसानों द्वारा गेंहू की फसल में तरह तरह को दवाइयों के छिड़काव एवं उपलब्ध मात्रा में यूरिया दिया जा रहा है,लेकिन फिर भी किसानों को इल्लियों का प्रकोप कम होता नजर नही आ रहा है,किसानी की चिंता इसलिए भी और बढ़ गई है,की खरीब की फसल के बर्बाद होने पर किसानों ने रबी की फसल आर्थिक समस्याओं के उपरांत भी बोई किन्तु अब रबी की फसल में इल्लियों के प्रकोप से लाभ के आसार नजर नही आ रहे है,साथ ही किसानों को बोवनी का खर्च दुबारा से करना पड़ रहा है,किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है,की केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित मे अभी तक किसी प्रकार की आर्थिक राहत प्रदान नही की गई है,जिससे क्षेत्र के किसानों में असंतोष एवं भविष्य में होने वाले इस नुकसानी का भय सता रहा है।इल्लियों की प्रभाविता गेंहू के अतिरिक्त मटर एवं चना फसल में भी नुकसानी बढ़ती देखी जा रही है।
                 इधर किसान मनीष वालीवाला,जितेंद्र वालीवाला,राधेश्याम कचराजी सहित कई किसानों ने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी जी एस गाठिये के द्वारा प्रभावित खेतों पर इल्लियों के प्रकोप को दर्शाया,साथ ही किसानों ने अधिकारी भाभर को इल्ली को फाल आर्मी वर्म होना बताया,इस पर अधिकार भाभर ने बताया कि पुष्टि हेतु इल्ली की प्रजाति का परीक्षण,इल्ली के द्वारा पौधे पर नुकसानी का तरीका एवं इल्ली पर दवाइयों के प्रभाव जैसी कई बातों पर मूल्यांकन के बाद ही पुष्टि करना सम्भव है।
             किसान कैलाश वालीवाला 35 बीघा,संजय चटकिया 30 बीघा,सुरेश चौधरी 5 बीघा,शंकर सिंह राठौर 4 बीघा सहित क्षेत्र के कई किसानों ने दुबारा से अपने खेतों में गेहूं की बोवनी करनी पड़ी,इसी तरह प्रभावित किसान किशोर पाटीदार,मनीष पाटीदार,कैलास पाटीदार,सोहन पाटिल,राजेश पाटिल,कृष्ण कचराजी,राधेश्याम कचराजी,नारायण कचराजी सहित लगभग 150 बीघा में इसकी समस्या को दर्शाया।
          किसान नन्दकिशोर वाली वाला ने बताया कि -"कृषि अधिकारी के मार्गदर्शन में इल्ली का प्रकोप होने पर प्रयोग के रूप में क्लोरिपाइरिफॉस्-50 ई0सी0 यूरिया खाद  में मिलाकर सिचाई के आगे छिड़काव कर सिचाई की,24 घंटे में पुनःनिरिक्षण के बाद इल्लीया मृत पाई गई।
             एन.आर.भाभर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी केंद्र कोद द्वारा अन्य किसानो से भी अपील कर सल्लाह दी गई की उक्त दवाई से इल्ली एवं गेहूँ के जड़ क्षैत्र में माहू का प्रकोप भी खत्म हो जायेगा,समय पर फसल व भूमि उपचार करने से फसल में इल्ली व माहू ग्यारंटी से खत्म हो जावेगी।
               वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक जी एस गाढ़ियकृषि विज्ञान केंद्र धार ने बताया कि -" रबी की फसलों में इल्लियों के प्रकोप का मौजूदा प्रभावित क्षेत्रो में निरीक्षण कर इल्ली की प्रजाति की पुष्टि की जाएगी,फिलहाल किसानों को क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क कर उनके द्वारा प्रयोगों के आधार पर प्रकोप का निदान करें।"

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